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Abramhanyam!  वह एक धर्मनिष्ठ सेवक था।  'तुम सुबह भीख मांगते हो।  शिवलस न मुझे।  कहाँ है?  उसे इसकी जरूरत थी।  अन्य भिखारी धर्म को 'यह देखना, यह देखना' के रूप में लाने लगे।  और नौकर उसे हाथ से ले गया, और उसे कुछ बूँदें दीं।  धर्म नीचे चला गया।  उसके पेट पर धर्मी नौकर - एक पापी नौकर - लात मारी!  आंसू में धर्म फूटा;  लेकिन उसी समय गाने की खूबसूरत थाली लाउंज में जलाई गई थी;  इसलिए वह फुटपाथ पर किसी को नहीं सुन सकती थी।


  • केकड़ों को बांटा 

 केकड़ों को बांटा गया।  'दादा, हमें कुछ नहीं मिला।  हम थोड़ा इंतजार करते हैं।  दे रडा दादा की दूसरी पंक्ति थोड़ी। '  कुछ गरीब भिखारी कह रहे थे कि।  दिन करीब आ गया।  शाम हो गई थी।  फिर भी कुछ भिखारी घुटने टेक कर बैठे थे, उम्मीद कर रहे थे।  गली की ठंडी धुंध में बैठा था।  रात थी, शहर में रोशनी थी।  गोपालदास का बंगला इंद्रपुरी जैसा दिखता था।  आकाश के हजारों तारे नीचे आ गए और उनके घरों के अंदर चमकने लगे कि क्या किसी को पता है!  गरीबों की आत्माएं क्यों जल रही थीं?  गोपालदास की एक रात उपवास थी।  प्रसिद्ध गाय आ गई थी।  नृत्य भी था।  आराम और आराम का कोई नुकसान नहीं हुआ।


  • धर्म कहाँ

 लेकिन वह धर्म कहाँ था?  सभी भिखारी भोजन की प्रतीक्षा कर रहे थे।  सभी सराय में प्रवेश कर गए।  जो टुकड़े मिले वे सबसे नीचे बैठकर खा रहे थे।  लेकिन धर्म कहां है?  वह अब भी भीख क्यों मांग रहा था?  वह अपने पिता की अस्थियाँ जहाँ भी थीं, वहाँ पूजा करने क्यों गईं?


  • ठंडी हवा 

 रात को ठंडी हवा चल रही थी।  उसे सड़क के किनारे पड़ा हुआ देखना एक जीवित प्राणी है।  ओह, यह हमारा धर्म है।  वह नहीं उठाता।  ईश्वर की हवा का ठंडा ठंडा हाथ इस सब से बह गया।  उसकी जान में जान आई।  यह क्या है  वह क्या ढूंढ रहा है?  धर्म?  क्यों याद आ रहे हो  लड्डू-जिल्बी टुकड़ा?  सब्जी क्यों?  क्या याद आ रही है?


  • मैंने सब कुछ खो दिया है।  

 'समझ गया, मैंने सब कुछ खो दिया है।  ऊप्स!  अब मैं किसका समर्थन करूं?  कौन मुझे बोरियत देगा?  मेरे आँसू कौन देख सकता है?  नेल।  मैंने इसे मान लिया।  मुझे लूट लिया  मुझे कौन ले गया है?  पिता की कृपा हो गई, वह छाता चला गया ... 'लड़के का शोक, भिखारी का शोक रोटी के लिए नहीं था, लाड़ के लिए नहीं था, पिता की स्मृति के लिए, जिल्बी के लिए नहीं था।  वह कोहरे के लिए था।


  •  धर्म गर्भ में था।

 धर्म गर्भ में था।  क्या वे भूखे थे या लकवाग्रस्त थे?  किसी तरह धर्म अपने पेट पर हाथ रखकर आगे बढ़ रहा था।  मानो उन सभी बलों को चला गया था।  उस वस्त्र में चेतना थी।  उनकी आत्मा को कपड़े पहनाए गए।  सड़क पर अंधेरा छा गया, आंखों के सामने अंधेरा छा गया और वह बैठ गई।  किसी तरह वह उस सराय में जाना चाहता था।

 वह आखिरकार पहुंचे।  वह तालाब के तल में चला गया।  वहां वह रोते हुए बैठ गई।  रीटा की आंखों में आंसू की झील गिरने लगी।  झील भिखारियों से भर गई।  रोते हुए ही धर्म सो गया।  उसके पास अनंत काल था।


  • गोपालदास के घर में संगीत चल रहा था।

 गोपालदास के घर में संगीत चल रहा था।  'वाह, क्या मजा है!'  रसिक कहता था, सिगरेट पीना।  खरपतवार खा रहा था।  पेले झटके मार रहा था।

 सुबह हुई और सूर्यनारायण बाहर आए।  पक्षी घोंसले से बाहर आए।  भिखारी बुनाई करने बाहर चला गया।  लेकिन उस तहखाने में अभी भी कौन सो रहा है?  यह धर्म है।  उसकी आत्मा भगवान से भीख मांगने गई है।  क्या उसे वहां भीख मिलेगी?


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